अध्याय 184

कोडी की आँखें दर्दभरे अपराधबोध से भर आईं। “भगवान का शुक्र है तुम सुरक्षित हो। क्या सेड्रिक ने तुम्हें बचाया? कम-से-कम उसने—” उसने स्वाभाविक ही मान लिया था कि उसकी पोती को बचाने उसका पोता ही पहुँचा होगा।

लेकिन कैट्निस बस मुस्कुरा दी—होठों पर एक कड़वी, व्यंग्यात्मक लकीर। “नहीं, दादाजी। मुझे गिडियन ने...

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